खोदावंदपुर,बेगूसराय। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर, बेगूसराय द्वारा भारत सरकार के राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत दौलतपुर पंचायत के चलकी गांव में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में करीब 70 किसानों, महिला किसानों, कृषि विद्यार्थियों एवं ग्रामीण युवाओं ने भाग लिया. इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य संवर्धन एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई तथा पौधारोपण कर हरित पर्यावरण का संदेश दिया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र खोदावन्दपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ राम पाल ने की. उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए किसानों से पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाने की अपील की. उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के संतुलित प्रयोग पर जोर दिया. वहीं फसल उत्पादन विषय विशेषज्ञ डॉ अभिक पात्रा ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असंतुलित उर्वरक उपयोग एवं फसल अवशेषों के अनुचित प्रबंधन से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. उन्होंने किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, हरी खाद, जैव उर्वरकों तथा फसल चक्र अपनाने की सलाह दी. उद्यानिकी विषय विशेषज्ञ डॉ एन पाटिल ने पर्यावरण संरक्षण में वृक्षारोपण और बागवानी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए किसानों को कृषि वानिकी मॉडल अपनाने तथा खेतों की मेड़ों पर उपयोगी वृक्ष लगाने की सलाह दी. उन्होंने पोषण वाटिका स्थापित करने पर भी बल दिया, जिससे परिवारों को पौष्टिक आहार उपलब्ध हो सके. कार्यक्रम के दौरान किसानों एवं ग्रामीण युवाओं को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई, साथ ही जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक खेती, जैव विविधता संरक्षण एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारियां प्रदान की गई. विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर सभी उपस्थित लोगों से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया. कार्यक्रम के अंत में किसानों एवं महिला किसानों ने पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी बचाने के लिए वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया. कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, प्रगतिशील किसानों, कृषि विद्यार्थियों तथा ग्रामीण युवाओं की सक्रिय भागीदारी निभाई.