खोदावंदपुर,बेगूसराय। बरियारपुर पूर्वी पंचायत के उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मसुराज के पहुंचपथ की जमीन के सीमांकन की मांग को लेकर बुधवार को जमीन मालिकों ने विद्यालय जाने वाले रास्ते को बांस-बल्लों से अवरुद्ध कर दिया, इसके कारण विद्यालय में पठन-पाठन पूरी तरह प्रभावित हो गया और छात्र-छात्राओं को बिना पढ़ाई किए ही घर लौटना पड़ा. वहीं विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं संभावित विवाद और सुरक्षा की आशंका को देखते हुए प्रखंड संसाधन केंद्र खोदावंदपुर पहुंच गये. वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार अनल ने बताया कि विद्यालय की स्थापना से ही मुख्य सड़क से स्कूल तक जाने के लिए सरकारी पहुंचपथ नहीं है. छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक वर्षों से निजी जमीन होकर विद्यालय आते-जाते रहे हैं. विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते में मसुराज निवासी स्वर्गीय बुच्ची यादव एवं स्वर्गीय उपेंद्र यादव की रैयती जमीन पड़ती है. ग्रामीणों के अनुरोध पर बुच्ची यादव के परिजन एवं मसोमात मंगली देवी ने विद्यालय के लिए अपनी-अपनी पांच फीट जमीन देने पर सहमति जतायी थी, लेकिन खेत की मेड़ (आड़ी) के सही सीमांकन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया. जमीन मालिकों का कहना है कि उनके पास सीमित भूमि है और वे खेत के बीच से स्थायी सड़क नहीं बनने देंगे. उनका कहना है कि सीमांकन कर जमीन के किनारे से रास्ता बनाया जाये. इसी मांग को लेकर उन्होंने विद्यालय जाने वाला रास्ता बंद कर दिया. प्रधानाध्यापक ने बताया कि रास्ता बंद होने के कारण बुधवार को विद्यालय में पढ़ाई नहीं हो सकी और सभी छात्र-छात्राओं को वापस भेजना पड़ा. उन्होंने संभावित तनाव और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन देकर शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति अस्थायी रूप से बीआरसी में किए जाने की मांग की है. प्रधानाध्यापक के अनुसार 15 जुलाई को राजकीय डिग्री कॉलेज के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों के निर्देश पर पहुंचपथ पर राविस गिराया गया था. इसके बाद ही जमीन मालिकों ने सीमांकन का मुद्दा उठाते हुए आपत्ति दर्ज करायी और विवाद गहरा गया.
वहीं दूसरी ओर प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि विद्यालय के पहुंचपथ के लिए आवश्यक जमीन देने पर जमीन मालिक सहमत हैं. केवल सीमांकन कर मेड़ चिन्हित किया जाना शेष है, जिसे शीघ्र पूरा कराया जायेगा. उन्होंने बताया कि शिक्षकों को अपने-अपने विद्यालय में ही बने रहने का निर्देश दिया गया है तथा प्रशासन मामले के समाधान का प्रयास कर रहा है.